नारायण नागबली पूजा के लाभ, विधि और पंडित त्र्यंबकेश्वर

नारायण नागबली पूजा के लाभ, विधि और पंडित त्र्यंबकेश्वर

क्या है नारायण बली पूजा ?

नारायण नागबलि पूजा एक तीन दिवसीय हिंदू अनुष्ठान है जो नासिक जिले [महाराष्ट्र, भारत] में त्र्यंबकेश्वर में किया जाता है ।  नारायण नागबली पूजन में दो अलग-अलग अनुष्ठान होते हैं।जो  अधिकतर हिंदुओं द्वारा किये  जाते  है।

यह पूजा अधिकतर वे लोग करते हैं जो अपने पूर्वजों की मोक्ष की कामना करते है।नारायण बलि के बारे में यह भी  कहा जाता है कि यह किसी व्यक्ति को पितृ दोष से छुटकारा दिलाता है, जिसे पितृ श्राप भी कहा जाता है,तथा जो  लोग अकाल मिर्त्यु  में मरते है जैसे  बीमारी से या सांप काटने से छत से गिरने से, फांसी लगने से ,पानी में डूबने से, बिजली के करंट द्वारा अचानक मिर्त्यु हो जाती है और उनकी आत्मा भूत प्रेत के रूप  में भटकती रहती है उनकी असंतुष्ट इच्छाओ को पूरा करने क लिए नारायण नागबली पूजा की जाती है। नारायण  नागबली पूजा विधि एक अंतिम संस्कार में की जाने वाली विधि के सामान है क्यूंकि यह कहा जाता है की अंतिम संस्कार आत्मा को दूसरी दुनिया से मुक्त करता है ।

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नारायण नागबली पूजन करने से भूत पिशाच बाधा, व्यवसाय में सफलता न मिलना, स्वास्थ्य की समस्या बनी रहना या परिवार में शांति की कमी, विवाह में आ रही बाधा आदि समस्याओं से भी छुटकारा मिलता है। नागबली  के द्वारा  एक ऐसा तरीका है जो किसी व्यक्ति को सांप (गेहूं के आटे से बना एक कोबरा बना कर ) को मारकर पाप से छुटकारा पाने में सक्षम बनाता है। नारायण बलि पूजा करने से व्यक्ति मृत आत्माओं की अधूरी सांसारिक इच्छाओं को पूरा कर सकते  है, जो संतान या रिश्तेदारों को परेशान कर सकती है।

त्र्यंबकेश्वर में नारायण बली का महत्त्व

अनुष्ठान में नारायण बली और नागबली नामक दो महत्वपूर्ण भाग होते हैं, जो क्रमशः पहले और दूसरे दिन किए जाते हैं। तीसरा दिन गणेश पूजन, पुण्य वचन और नाग पूजन नामक अनुष्ठान के लिए आरक्षित है। गरुड़ पुराण का 40वां अध्याय नारायण बली संस्कारों को समर्पित है। इन  अनुष्ठान को विशेष रीति रिवाजों और मंत्रों द्वारा संपन्न करते  है। इसमें भगवान विष्णु और भगवान शिव की पूजा की जाती है, जो जातकों की अभिलाषाओं को पूरा करने और उनके जीवन में समृद्धि लाते  है ।

नारायण नागबली पूजा विधि

त्र्यंबकेश्वर में नारायण नागबली पूजा की जानकारी ‘निर्णय सिंधु’, स्कंदपुराण और पद्म पुराण में उल्लेख की गयी हैं।

नारायण नागबली पूजा की  विधि को पूर्ण करने के लिए ३ दिन  का समय आवश्यक है ।

नारायण नागबलि पूजा एक विशेष तरीके से की जाने वाली पूजा है जो हमारे पूर्वजों को समर्पित होती है।

नाशिक त्र्यंबकेश्वर में नारायण नागबलि पूजा अनुष्ठान के लिए कुछ विशेष विधियां होती हैं, जो निम्नलिखित हैं:

नारायण नागबली पूजा कैसे की जाती है ?

  • सबसे पहले पुजारी नारायण नागबलि पूजा के लिए एक उपयुक्त स्थान का चयन करता है।
  • जो सभी साधनों से संपन्न होना चाहिए।
  • नारायण नागबलि पूजा को मन्दिर या पवित्र नदी के किनारे जैसी पवित्र स्थानों पर ही किया जाता है।
  • इस पूजा की सामग्री जैसे फूल, फल, मिठाई, दूध, दही, घी, तिल, रुई,आदि को भगवान को अर्पित किया जाता है।
  • पूजा के दौरान पंडित तथा जातक को प्रातःकाल उठकर स्नान करना चाहिए और नए वस्त्र धारण करने चाहिए।
  • तत्पश्च्यात फिर पुजारी द्वारा विशेष मन्त्रों का जाप करके  ब्रह्मदेव पूजन, रूद्र पूजन,  विष्णु पूजन, महाविष्णु पूजन, प्रेतपूजन तथा यमपूजन किया जाता है।
  • पंचदेवता पूजन के पश्चात एकादश विष्णु श्राद्ध की विधि की जाती है, जिसके बाद नारायण बलिदान किया जाता है।
  • इसके बाद नागबलि का अनुष्‍ठान करना होता है।
  • नागबलि पूजा एक महत्वपूर्ण पूजा होती है, जो नागों को समर्पित होती है।
  • इसमें गेहूं के आटे और दूध से एक सांप का निर्माण किया जाता है।
  • और इसे भगवान विष्णु को समर्पित किया जाता है।
  • फिर भगवान विष्णु और भगवान शिव के नामों का जाप करना होता है।
  • जिससे जातकों को उनका आशीर्वाद प्रदान  होता हैं।
  • पूजा के दुसरे दिन  नागबली पूजा में  गेहूं के आटे से निर्मित साँप के शरीर का अंतिम संस्कार विधि पूर्ण किया जाता है।
  • अग्नि संस्कार के बाद उस नाग की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध पूजा की जाती है।
  • पूजा के तीसरे दिन घर में श्री गणेश पूजन, नाग पूजा, पुण्याह वाचन की जाती है।
  • इस विधि के बाद धातू से निर्मित नाग की मूर्ति पण्डितजी को प्रदान की जाती है।
  • इस तरह से पितृ दोष, पितृ शाप, नागशाप दोष, प्रेतशाप दोष का निवारण  किया जाता है।

नारायण नागबली पूजा के लाभ

त्र्यंबकेश्वर में नारायण नागबली पूजा एक प्राचीन धार्मिक प्रथा है जो हमारे पूर्वजों को समर्पित है।

इस पूजा के कई लाभ होते हैं, जो निम्नलिखित हैं:

  1. आर्थिक समृद्धि: नागबली पूजा करने से आपके जीवन में धन वर्षा होती है। इस पूजा में नाग देवताओं की पूजा की जाती है जो आपकी आर्थिक समस्याओं का समाधान करने में मदद करते हैं।
  2. स्वास्थ्य  लाभ: नारायण नागबलि पूजा करने से आपको स्वास्थ्य के लाभ भी मिलते हैं। यह पूजा जंगली साँपों से जुड़ी समस्याओं को दूर करने में मदद करती है।
  3. धन और सुख: नागबलि पूजा करने से आपको धन और सुख का लाभ मिलता है। यह पूजा आपके जीवन में  शांति लाती है। यह नारायण नाग बलि पूजा अनुष्ठान व्यवसाय के साथ-साथ करियर में  व्यक्ति की इच्छाओं को पूरा करने में मदद करता है। नारायण नागबली पूजा करने से  सबसे अच्छा लाभ पूरे परिवार में संतुष्टि और सकारात्मकता प्राप्त होती  है।
  4. उपयोगी संपत्ति: नारायण नागबली पूजा करने से आपको उपयोगी संपत्ति मिलती है। इस पूजा से आपके जीवन में उत्तम अवसरों का आगमन होता है।
  5. पितृदोष एवं पितृशाप – नारायण नागबली पूजा करने से  किसी व्यक्ति के पितृ दोष तथा पितृशाप निवारण होता  है । असामयिक मृत्यु प्राप्त करने वाले मृत पूर्वज की आत्मा द्वारा उत्पन्न समस्याओं का निवारण भी नागबली पूजा द्वारा किया जाता है।
  6. संतान सुख – नारायण नागबली  पूजा  विशेष रूप से उन दंपतियों जोड़ों के लिए की जाती है, जो संतान होने में जटिलताओं का सामना कर रहे हैं। । नारायण नागबली  पूजा करने से संतान प्राप्ति का सुख भी संभव है।  

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नारायण नागबली पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ पंडित

यह पूजा करने के लिए हमें एक अच्छे जानकार वाले पंडित की जरूरत पड़ती है।  नारायण नागबली पूजा त्रंबकेश्वर में परम्परागत  अधिकार तथा तरीके  के अनुसार की  जाने वाली पूजा है जो केवल गुरूजी के द्वारा ही हो सकती है। नारायण नागबलि पूजा एक परंपरागत पूजा है और यह भारतीय संस्कृति में बहुत महत्वपूर्ण है। त्रंबकेश्वर में सदिओं से विभिन्न धार्मिक पूजाएं चली जा रही है।  नारायण नागबली पूजा को  विधि विधान से संपन्न करने की पूरी जानकारी हो ऐसे पंडित से ही हमें यह पूजा करानी चाइये।  हमारे द्वारा वह प्रमाणित श्रोत श्री जय नारायण शास्त्री जी है। आप पंडित जी से उनके मोबाइल नंबर 7887888755 पर संपर्क कर सकते हैं।

नारायण नागबली पूजा तिथि २०२६ (मुहूर्त)

जनवरी – २०२६2, 5, 8, 11, 20, 26, 29
फ़रवरी – २०२६1, 4, 7, 10, 13, 16, 22, 25
मार्च – २०२६1, 4, 8, 11, 15, 21, 25, 28
अप्रैल – २०२६2, 6, 9, 12, 18, 21, 24, 29
मई – २०२६3, 6, 9, 15, 18, 21, 26, 31
जून – २०२६5, 12, 15, 18, 23, 27
जुलाई – २०२६3, 9, 12, 15, 18, 21, 26, 30
अगस्त – २०२६5, 8, 12, 14, 18, 22, 26
सितंबर – २०२६1, 4, 8, 11, 20, 22, पितृपक्ष (28)
अक्टूबर – २०२६(पितृपक्ष 1, 5, 8, 26)
नवंबर – २०२६1, 4, 13, 16, 22, 26, 29
दिसंबर – २०२६4, 8, 13, 20, 23, 26, 29
नारायण नागबली पूजा तिथि २०२६ (मुहूर्त)


त्र्यंबकेश्वर में नारायण नागबली दक्षिण

नारायण नागबली की पूजा दक्षिणा तामपत्रधारी पंडित जी  द्वारा उपयोग  में लाये जाने वाली सम्पूर्ण सामग्री पर निर्भर करती है और  नारायण नागबली पूजा समाप्त होने के पश्च्यात यह पूर्ण रूप से यजमान पर निर्भर करता है की वह कितनी और क्या दक्षिणा पंडित जी को प्रदान करेंगे।  दक्षिणा की राशि आपकी इच्छानुसार होती है लेकिन इसमें सामान्य रूप से 7000 रुपये तक की राशि दी जाती है और नारयण नागबली पूजा दक्षिणा पंडितो के लिए पूजा सामग्री, खाद्य सामग्री , सफ़ेद वस्त्र दान (धोती , गमछा, नैपकिन और साडी ब्लाऊज़ आदि )काले कपडे, हरे रंग के कपडे दान करना चाइये। 

तथा पंडित जी को भोजन कराकर उन्हें दक्षिणा अपने अनुसार प्रदान करनी चाहिए। 

बिना पंडित जी को दक्षिणा प्रदान किए पूजा सफल नहीं होती है।

दक्षिणा देने से पहले, पंडित द्वारा बताई गई राशि का ध्यान रखना चाहिए।

इसे सम्मानपूर्वक देना चाहिए। दक्षिणा देने के बाद, आपको पंडित जी से आशीर्वाद लेना चाहिए।

ध्यान रखें कि नारायण नागबलि पूजा एक परंपरागत पूजा है और यह भारतीय संस्कृति में बहुत महत्वपूर्ण है।

इसलिए, दक्षिणा देते समय संयम और सम्मान का पालन करना चाहिए।

त्रंबकेश्वर में नारायण नागबली पूजा

त्र्यंबकेश्वर शिव मंदिर (श्री त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर) भारत के महाराष्ट्र के नासिक जिले में त्र्यंबकेश्वर तहसील में त्र्यंबक शहर में एक प्राचीन हिंदू मंदिर है ।  त्र्यंबकेश्वर एक धार्मिक केंद्र है जो  बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यह हिंदू भगवान शिव को समर्पित है और उन बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है जहां हिंदू वंशावली त्र्यंबकेश्वर, महाराष्ट्र में दर्ज है।जिस कारण इसको त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर भी कहा जाता है ।  यहाँ स्थित ज्योतिर्लिंग की असाधारण विशेषता इसके तीन मुख हैं जो भगवान ब्रह्मा, भगवान विष्णु और भगवान रुद्र का रूप धारण करते हैं। यह एक प्रकार से भक्तों  के लिए आशाजनक स्थान है। त्र्यंबकेश्वर मंदिर के लिए यह भी माना जाता है कि जो इसके दर्शन कर  देता  है उसको मोक्ष की  प्राप्ति होती है।

यह स्थान भगवान शिव के विशेष अनुष्ठान के लिए विख्यात है।

जिसे नारायण नागबली के नाम से जाना जाता है।

तथा यह पूजा ताम्रपत्रधारी  गुरूजी द्रारा ही की जाती है।

भगवान शिव ही केवल आत्म समर्पण आत्माओ के पाप को मिटा सकते है।

तो नारायण नागबली पूजा जो पूर्वजो के मोक्ष के लिए ही की जाती है।

उस अनुष्ठान/पूजा करने के लिए त्र्यंबकेश्वर स्थान अधिक उचित है।

नारायण नागबलि पूजा एक परंपरागत पूजा है और यह भारतीय संस्कृति में बहुत महत्वपूर्ण है।

त्रंबकेश्वर में सदिओं से विभिन्न धार्मिक पूजाएं चली जा रही ।

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